Kanhaiya Kumar (@kanhaiyakumar )

Kanhaiya Kumar

Bio Former President of JNU Students Union; Author- From Bihar to Tihar
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Account created 23-06-2014 20:46:00
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Android : प्रधान-सेवक जी को भेजो मेल
बिन तैयारी वाला लॉकडाउन हो गया फ़ेल
‘नए भारत’ का नया ही खेल
मरते मज़दूर, भटकती रेल

Android : ये सरकार जब से सत्ता में आई है, इसने अपने ही नागरिकों के खिलाफ़ एक जंग छेड़ रखी है। सरकार से सवाल को देशद्रोह और विरोध को आतंकी गतिविधि मान लिया गया है। जब दुनियां कोरोना से लड़ रही है तब भी सरकार अपनी ही युनिवर्सिटी और विद्यार्थियों पर हमले कर रही है। शर्मनाक!

#StandWithJamia

Android : बंगाल-उड़ीसा में अम्फ़न तूफान से भारी नुकसान की खबरें मिल रही हैं। स्थानीय साथियों से अपील है कि प्रशासन से मिलकर राहत कार्य में सहयोग करें। पूरा देश इस संकट की घड़ी में आपके साथ है, उम्मीद है कि कोरोना व तूफान की दोहरी मार झेल रहे इन राज्यों को केन्द्र से विशेष सहायता भी मिलेगी।

Android : समस्या चाहे जो भी हो, हर बार इस सरकार ने ये साबित किया है कि इनको इंसानों से ज्यादा 'कागज़' की परवाह है।

Android : जब सरकार को यही नहीं मालूम है कि किस राज्य के कितने मजदूर कहाँ काम करते हैं तो फिर उनके कल्याण के लिए की गई घोषणा की हकीकत क्या होने वाली है, इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं। सरकार से सिर्फ इतना भर पूछ लें कि देश में मजदूरों की संख्या क्या है? तो भी आपको देशद्रोही कहा जा सकता है!

Android : कोरोना वायरस के बाद पहली बार बोले कन्हैया कुमार -
असहमति की आवाज़ें दबाई जा रही हैं।
छात्र नेताओं, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल भेजा जा रहा है।
क्या सरकार इस आपातकाल का फ़ायदा उठाकर,बदले की राजनीति कर रही है?
Exclusive with Kanhaiya Kumar
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Android : सरकारों का दावा है कि वो मजदूरों का ख्याल रख रही हैं। कैसे? मजदूरों को सुरक्षा देने वाले देश के श्रम कानूनों को खत्म करके! है न कमाल की बात?

राग दरबारियों की भाषा में इसी बेशर्मी को कहते हैं- "मास्टर स्ट्रोक"

Android : गुजरात मॉडल ध्वस्त हो चुका है।

गुजरात की स्थिति ऐसी है कि कोरोना के मरीज अस्पताल के बाहर बैठे हैं। उन्हें भगवान के भरोसे छोड़ दिया जा रहा है।

हद्द तो तब हो गयी जब जिस मरीज का अस्पताल में इलाज चल रहा था उसकी लाश 5 दिन बाद बस स्टैंड पर मिलती है।

क्या यही है गुजरात मॉडल?

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Android : रोज देश के किसी न किसी कोने से मजदूरों और मरीजों के मरने की दर्दनाक खबरें आ रही हैं। इस गम के दौर में भी राग-दरबारियों की टोलियाँ 'छः साल बेमिसाल' की ख़ूबियाँ गिना रही है।

Android : तपती धूप और पेट की भूख देश भर के मजदूरों की आँखों की उम्मीद और आंसू दोनों को सुखा रही है लेकिन हुकूमत की बेपरवाही और बेशर्मी ऐसी कि जुमलों के हमले रुक ही नहीं रहे।

Android : कौन कहता है कि सरकार काम नहीं कर रही?? धन्नासेठों के लोन माफ कर रही है, अपनी जान पर खेलकर जनता की सेवा में लगे सरकारी कर्मचारियों के भत्ते काटकर उनका वेतन कम कर रही है, मजदूरों के हित के लिए बने श्रम कानून खत्म कर रही है।

और कितना काम करेगी बेचारी सरकार??थकान भी तो होती है ना!

Android : वादा-
“सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” **

**शर्तें लागू-
ग़रीबों, मज़दूरों और बेरोज़गारों को छोड़कर

Android : प्रवासी मजदूरों को शहर में भी बाहरी कहा जाता है और गाँव से पलायन कर जाने के कारण वो वहाँ के लिए भी परदेसी बन जाते हैं। अपने देश में ही प्रवासी बन गए इन मजदूरों का दर्द ये है कि लॉकडाउन ने शहर को इनके लिए रहने लायक नहीं छोड़ा और महामारी की आशंका इनको गाँव में घुसने नहीं दे रही।

Android : कोरोना ने समाज के एक बड़े तबके को बुरी तरह से प्रभावित किया है। खासकर गरीबों-मजदूरों के लिए यह जीने-मरने का सवाल बन चुका है। अपने घर लौटने की जद्दोजहद में लगातार मजदूरों की जान जा रही है, सत्ता व समाज को इसे गंभीरता से लेना चाहिए वरना मानवता की हमारी सारी दलीलें खोखली साबित होगी।

Android : विशाखापट्टनम में जहरीली गैस लीक होने के कारण हुए हादसे में हताहत होने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कोरोना महामारी के बीच यह हादसा लोगों पर कहर बन कर टूटा है। स्थानीय साथियों से अपील है कि राहत कार्य में प्रशासन का हरसंभव सहयोग करें।

#VizagGasLeak

Android : देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही मंदी की मार झेल रही है। उस पर कोरोना महामारी ने बेकारी और गरीबी की आग में पेट्रोल का काम किया है। इस संकट की घड़ी में देश को मनभेद और नफ़रत की नहीं बल्कि सकारात्मकता एवं एकता की जरूरत है।

Android : देश से प्रेम के लिए किसी तरह की नफ़रत की जरुरत नहीं है। जिनका नफ़रत के बिना काम नहीं चलता, दरअसल उनकी इंसानियत और मुहब्बत की डोर थोड़ी कमजोर है।

Android : जब कोरोना के चलते जेल से कैदियों को रिहा करना पर रहा है तो फिर राजनीति से प्रेरित होकर कई लोगों को क्यों गिरफ्तार किया गया है? यह राजनीतिक दुश्मनी निकालने का समय नहीं है। इन हरकतों से महामारी के प्रति गंभीरता को लेकर सवाल खड़े होंगे।

#ReleaseAllPoliticalPrisoners
#ReleaseAnand